धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी
आज का शुभ समय
सर्वाधिक शुभ समय: शाम 7:15 बजे
महालक्ष्मी हिन्दू धर्म में धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं। वह भगवान विष्णु की पत्नी हैं और दिवाली के त्योहार पर विशेष रूप से पूजी जाती हैं। महालक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-शांति का वास होता है।
महालक्ष्मी पूजा विशेष रूप से दिवाली की रात की जाती है जब देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घरों में विराजमान होती हैं।
महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र, लाल कपड़ा, चावल, रोली, मोली, फूल, फल, नारियल
धूप, दीपक, घी, कपूर, अगरबत्ती, कुमकुम, हल्दी, चंदन
मिठाई, फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), बताशे, लड्डू
सिक्के, आभूषण, नए वस्त्र, गंगाजल, पान के पत्ते, सुपारी, इलायची
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल कपड़ा बिछाएं।
महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन पर रोली, चावल, फूल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें: "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:"
महालक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के बाद दान-पुण्य अवश्य करें।
प्राचीन समय में एक गरीब ब्राह्मण था। वह नियमित रूप से महालक्ष्मी की पूजा करता था। एक बार दिवाली के दिन उसने महालक्ष्मी का व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से पूजा की।
उस रात महालक्ष्मी ने स्वप्न में आकर उसे बताया कि उसके घर के पिछवाड़े में एक खजाना दबा हुआ है। अगले दिन ब्राह्मण ने वहां खुदाई की तो उसे बहुत सारा धन मिला।
इसके बाद ब्राह्मण ने महालक्ष्मी का मंदिर बनवाया और नियमित रूप से पूजा करने लगा। धीरे-धीरे वह धनवान और समृद्ध हो गया। इस प्रकार महालक्ष्मी की कृपा से उसका जीवन सुखमय हो गया।
इस कथा का मूल उद्देश्य यह है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से महालक्ष्मी की पूजा करने वाले को देवी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।