महालक्ष्मी देवी पूजा विधि

धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी

Maha Laxmi Mata pujan 2025

दिवाली पूजा मुहूर्त

आज का शुभ समय

शाम 6:30 बजे से रात 8:15 बजे तक

सर्वाधिक शुभ समय: शाम 7:15 बजे

महालक्ष्मी देवी का परिचय

महालक्ष्मी हिन्दू धर्म में धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं। वह भगवान विष्णु की पत्नी हैं और दिवाली के त्योहार पर विशेष रूप से पूजी जाती हैं। महालक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और सुख-शांति का वास होता है।

महत्वपूर्ण जानकारी

महालक्ष्मी पूजा विशेष रूप से दिवाली की रात की जाती है जब देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घरों में विराजमान होती हैं।

पूजन सामग्री

मुख्य सामग्री

महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र, लाल कपड़ा, चावल, रोली, मोली, फूल, फल, नारियल

धूप-दीप सामग्री

धूप, दीपक, घी, कपूर, अगरबत्ती, कुमकुम, हल्दी, चंदन

प्रसाद सामग्री

मिठाई, फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), बताशे, लड्डू

विशेष सामग्री

सिक्के, आभूषण, नए वस्त्र, गंगाजल, पान के पत्ते, सुपारी, इलायची

पूजा विधि

प्रथम चरण

सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल कपड़ा बिछाएं।

द्वितीय चरण

महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन पर रोली, चावल, फूल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।

तृतीय चरण

महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें: "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:"

चतुर्थ चरण

महालक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के बाद दान-पुण्य अवश्य करें।

महालक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निसदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता
तुम पाताल-निवासिनी, तुम ही शुभदाता
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता
जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई गाता
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता

महालक्ष्मी व्रत कथा

प्राचीन समय में एक गरीब ब्राह्मण था। वह नियमित रूप से महालक्ष्मी की पूजा करता था। एक बार दिवाली के दिन उसने महालक्ष्मी का व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से पूजा की।

उस रात महालक्ष्मी ने स्वप्न में आकर उसे बताया कि उसके घर के पिछवाड़े में एक खजाना दबा हुआ है। अगले दिन ब्राह्मण ने वहां खुदाई की तो उसे बहुत सारा धन मिला।

इसके बाद ब्राह्मण ने महालक्ष्मी का मंदिर बनवाया और नियमित रूप से पूजा करने लगा। धीरे-धीरे वह धनवान और समृद्ध हो गया। इस प्रकार महालक्ष्मी की कृपा से उसका जीवन सुखमय हो गया।

इस कथा का मूल उद्देश्य यह है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से महालक्ष्मी की पूजा करने वाले को देवी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।